विभिन्न भारतीय शहरों में दशहरा मनाने के विभिन्न तरीके

हर कोई उत्सव मनाना पसंद करता है, और उन्हें मनाने के लिए भारत से बेहतर देश कोई नहीं। हमारा सांस्कृतिक रूप से समृद्ध देश जिसकी धरती से त्यौहारों की खुशबू आती है, आपको जातीय विविधता अनुभव करने की कई वजहें देता है। भारत में अधिकांश त्यौहार बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देते हैं; लेकिन, दशहरा इस जीत का सबसे बडा प्रतिक है। देश के कुछ पूर्वी, उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में विजयादशमी के नाम से जाना जाने वाला दशहरा मुख्य रूप से सजावट, आतिशबाजी, भोजन के लिए अपनी पहचान बना चुका है। यह त्यौहार, जो इस वर्ष अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में मनाया जाएगा, देश के विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न तरह से मनाया जाता है।

जानिए किस तरह भारत के विभिन्न क्षेत्रों में लोग दशहरा के उत्सव में शामिल होते हैं।

दशहरा क्यों मनाया जाता है?

दशहरे का महत्व उस दिन से जुड़ा है जब श्री राम ने राक्षस राजा रावण का वध किया था। इसी दिन, भगवान राम ने अपनी पत्नी, देवी सीता को लंका के राजा रावण की कैद से मुक्त कराया था। त्यौहार से जुड़ी एक और मान्यता है, जिसके अनुसार देवी दुर्गा ने एक युद्ध के दसवें दिन पराक्रमी राक्षस, महिषासुर का वध किया था। देवी द्वारा महिषासुर की हत्या करने वाले दिन को कोलकाता में विजय दशमी के रूप में मनाया जाता है।

दशहरे के विभिन्न तत्त्व

दशहरा देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। कुछ क्षेत्रों में लोग राम लीला में भाग लेते हैं, तो, कुछ अन्य इलाकों के लोग सार्वजनिक जुलूसों में शामिल होकर यह त्यौहार मनाते हैं।

जुलूस: देश के कुछ हिस्सों में लोग दुर्गा, लक्ष्मी, गणेश, सरस्वती और कार्तिक की मूर्तियों को नदी या किसी बड़े जल स्रोत में विसर्जित करने के लिए जुलूस निकालते हैं। ऐसे जुलूसों में लोग संगीत, नृत्य और गायन का आनंद लेते देखे जा सकते हैं।

राम लीला: कुछ स्थानों पर लोग रामायण के नाटकीय चित्रण, राम लीला में भाग लेते हैं। इन नृत्य नाटकों में, बच्चों, बड़ों सभी को रामायण के पात्रों के रूप में तैयार किया जाता है।

रावण दहन: रावण दहन भारत में कुछ स्थानों पर दशहरे का प्रमुख आकर्षण है। लोग बुराई के विनाश का जश्न मनाने के लिए रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतले जलाते हैं।

रावण दहन, पटाखे फोड़ना, रंगारंग प्रदर्शन और शहरों में आयोजित मेले इस त्यौहार को वर्ष का एक महत्वपूर्ण समय बनाते हैं। दशहरे के दौरान आप जिस भी शहर में हों, त्यौहार का शानदार समारोह आपके लिए समां बांधे रखेगा।

कौन से शहर इसे सबसे अच्छे से मनाता है

कोलकाता और मैसूर में दशहरा काफी लोकप्रिय है, लेकिन कई अन्य शहर भी हैं जहां का उत्सव पूरे देश के पर्यटकों को आकर्षित करता है। यदि आपने इस वर्ष दशहरे के लिए कुछ विशेष योजना नहीं बनाई है, तो आइए हम आपको दशहरा समारोह के लिए सर्वोत्तम स्थानों को खोजने में मदद कर देते हैं।

मैसूर

Mysore

मैसूर में दशहरा उत्सव मनाने की परंपरा 15वीं शताब्दी से है। दक्षिण के लोगों के लिए दशहरा का अर्थ मैसूरु दशारा या मैसूर दशहरा है, जो सभी महान परंपराओं और भव्यता के बारे में है। त्यौहार के दौरान मैसूर पैलेस को 100000 से भी अधिक प्रकाश बल्बों से सजाया जाता है।

दिल्ली

Delhi

दशहरे के आते ही देश की राजधानी का अलग ही रूप नज़र आता है। दिल्ली में राम लीला दशहरे के त्यौहार का अहम् हिस्सा होती है। राम लीला मैदान संगीतमय नाटक देखने के लिए सबसे अच्छे स्थानों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि राम लीला मंच शो लगभग 170 साल पहले शुरू किया गया था। रावण, उसके बेटे और उसके भाई के विशाल पुतलों को जलाना उत्सव का एक और प्रमुख आकर्षण है।

कोलकाता

Kolkata

कोलकाता में विजयादशमी सबसे बड़े सांस्कृतिक समारोहों में से एक है। लोग जुलूसों में भाग लेने के लिए देवी दुर्गा  की मूर्तियों ले कर सड़कों पर निकलते हैं और उन्हें हुगली या अन्य बड़े जल निकायों में विसर्जित करते हैं। बड़े-बड़े ढोल, नगाड़ों, बिगुलों की आवाज़ और नाचना-गाना उत्सव का मज़ा दुगुना कर देते हैं।

वाराणसी

Varanasi

दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक, वाराणसी किसी भी त्यौहार को मनाने के लिए सबसे अच्छे स्थानों में से एक है। दशहरे के दौरान, यह प्राचीन और आध्यात्मिक शहर एक अलग चमक के साथ नज़र आता है। दिल्ली की तरह, वाराणसी में भी आयोजित होने वाले राम लीला संगीत नाटक इस पवित्र शहर को दस दिनों तक घूमने के लिए सभी की पसंदीदा जगह बना देते हैं।

कुल्लू

Kullu

अन्य शहरों के विपरीत, कुल्लू में यह उत्सव विजयादशमी के दिन शुरू होता है और सात दिनों तक चलता है। इस हिमाचली शहर में त्यौहार मनाने की परंपरा 17वीं शताब्दी में शुरू हुई थी जो हर साल 4 से 5 लाख से भी अधिक वैश्विक पर्यटकों को आकर्षित करती है।

बस्तर

Bastar

बस्तर में दशहरे का उत्सव देश के अन्य क्षेत्रों के समारोहों से काफी अलग होता है। बस्तर में दशहरा मनाते हुए आप छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विशेषता की झलक देख सकते हैं। दस दिनों के इस उत्सव में आध्यात्मिकता, प्रकृति और देवी दंतेश्वरी का खास महत्व है।

मडिकेरी

Madikeri

कूर्ग के मडिकेरी में दशहरा धार्मिक से ज़्यादा कार्निवल शैली में मनाया जाता है। इस क्षेत्र में समारोहों का मुख्य आकर्षण दसवीं सुबह को समाप्त होने वाला जुलूस है, जो विजयादशमी को दर्शाता है। यहाँ कई तरह का संगीत, दावतें और प्रार्थनाएं इस उत्सव को भव्य बनाती हैं।

कई सामान्यताओं के बावजूद, दशहरे का उत्सव अलग-अलग स्थानों पर अलग तरह से मनाया जाता है। आप कोई भी शहर चुनें, यह सलाह दी जाती है कि अत्यधिक भुगतान से बचने के लिए अपनी उड़ान और होटल पहले से ही बुक कर लें।